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रौतहटके खेसरहियामे रहल लोकदेवी नेटुनिया माई

रौतहटके खेसरहियामे रहल लोकदेवी नेटुनिया माई

सञ्जय महतो राज, असार ०२ गते।
लोकदेवी देवता आ शास्त्रीय देवीदेवता दुनुके ओतने श्रद्धासे मानलजाइअ बज्जिका समाजमे । बहुत देवीदेवताके स्थानीय रूपमे कौनो निश्चित भूगोलमे मात्र भी विशेष चर्चा सुनलजाइअ । अइसने एगो लोकदेवीके रुपमे पूजित हए नेटुनिया माई ।
देवीदेवता बहुत हए मगर एगो गाँओके रक्षा करेबाला देवी नेटुनिया माई हए । रौतहटके माधवनारायण नगरपालिका वार्ड दु खेसरहिया गाँओमे अवस्थित नेटुनिया माई एक अलगरूपसे गाँओके रक्षाके लेल हमेशा तत्पर छथिन् ।
गाँओके सरकारी स्कुल सरस्वती मा .वि .खेसरहियाके पछाडि पछिमओर एगो बहुत बर्का पोखरा हए । कुछ लोग एकरा देवचाली पोखर भी कहले । बहुत दिन पहिले पोखरके चारोओरसे जङलझार रहे । जङलझार भेलासे आदमी जाएसे डेराए । पोखरमे सातगो इनार हए । अइसन बात सबके मालूम हए । पोखरीके ओर सामान्यतया कौनो अकेले नजाएके आ गेलापर भी पोखरमे कौनो डेङ नधरे ।
अचानक एकबेर कहाँसे नकहाँसे बहुते नटनटिन गाँओमे आगेल । नटनटिन होएलासे ओकनीके जौरे भैँसाभैँसी, कुत्ता आदि भी साथमे लेले आएल रहे । सभी कौनो सिर्की तानके रहे लागल रहे । जेभी कमीबेसी होखे ऊ गाँओके लोगसे माङके लेआबे । गाँओके लोग भी ओकनीके अपनासे सकेसे सहयोग करइरहे । ओकनी सबके एक महिना बितगेल ।
एक महिनाबाद सभी नटनटिन जाएके तैयार होगेल मगर एगो नटिन नगेल । ओकर सिर्की तनाएलही रहगेल । जब सभी नटनटिन दोसरा गाँओओर चलगेल तब ऊ पोखरीके आँटपर भैँसाके बान्हके सिर्की तानदेलक । पोखरीके आँटपर पहिलेसे ही जङलझार रहबे कएलक । लोग सब सम्झएलक कि पोखरीके पानीमे डेङ नधरिहे । लोगके बातपर सायद ओतना पतियार नभेल । एक दिनके बात हए । नटिनिया अपना भैँसाके पोखरीमे बोहिआएला पइँसादेलक । पोखरीमे पइँसलाके कुछे देरके बात भैँसा आ नटिन दुनु बिलागेल । गाँओमे एके तैकामे हाहाकार मचलगेल कि भैँसा आ नटिन दुनु कहाँ गेल ? कथि होेगेल ? गाँओके मलाह लोग भी सभीके सलाहसे जालसे छानके देखलक मगर केनहु कुछो थाहपत्ता नलागल ।
कुछ दिनके बाद लोगके सपना आबेलागल । सपनामे आबेबाला अइसन कहे “ हम उहे नटिन छी पोखरपर रहइरही । आइतक हम चारो ओर रहेला जगह खोजइरहली मगर हमरा इहे पोखरा निमन लागल । तोहनीके सामने नटिनके भेषमे रहली । ई गाँओसे बहुत आदर सत्कार मिलल । हम ई गाँओके छोरके नजाएम । सब कौने हमरा पूज् न त हम गाँओके विनाश कदेम ।” अइसन सपना बहुतलोग देखलक लेकिन सपनाके बातके ओर कौनो लोग ध्यान नदेलक । कुछ लोग त कहेकि नटिनके कहीँ गोर लगलइह । केकरो कुछो नहोतई । अइसन खाली बातेके बात हई, सपनेके बात हई ।
कुछे दिनमे बिगहीन नेटुनिया माई खिसियागेलन । ऊ साल गाँओमे बडी भारी बिपत परल । न केकरो बारीझारी उजिआए न अन्नबाली सहीसे उबजलक । कलके पानी भी नुनगर लागेलागल । गाँओके सबलोगके मुहबई पकडलेल । कौनोके कुछे उपाय नबुझाएल त बिगहीन नेटुनिया माईके गोहराबे लागल – रक्षा करु, रक्षा करु । अपना धियापोताके रक्षा करु । हमनी गाँओबासीसे बहुत बरका गल्ती होगेल । हमनी सबके जेलेखा कहम ओलेखा करब, हमनी पूजा करेला तैयार छी । जब गाँओके बेटाबेटी सब ही कौनो नरही त अपनके लङ–कसइली कौन दी ? कौन पूजा करी ?
अइसन बात सुनलाके बाद बिगहीन मानगेलन । सबलोग सात इनार भेल पोखरपर जाके पूजा करेलागल तब जाके धीरेधीरे सब कुछ ठीक होएलागल । धीरेधीरे पोखरीके नाओ भी नेटुनिया माई पोखरी होगेल । गाँओमे फेर पहिलेलेखा सुख, शान्ति होगेल, उब्जनी बढगेल, कल आ इनारके पानी नुनछराइनसे निमन होगेल पिएबाला ।
माईके विषयमे एगोआउर मिथक प्रचलनमे रहल हए । माई एकबेर गाँओके ब्रह्मबाबासे हमहु अपनेलोगके जौरे रहे चाहइछी कहलन । हम अपनेके दहिनाओर अपन स्थान राखेचाहइछी । ब्रह्मबाबा नेटुनिया माईके बात नमानलन । छोट जातके होएलासे अपना जौरे आ दहिनाओर नराखेकेके बतएलापर दुनुजनेमे लडाइ होगेल । धरतीपरसे गाछीपरतक लडाइ होएलागल । दुनुजनेके लडाइ गाछी नसहेसकल । बीचेबाची गाछी फाटगेल । नेटुनिया माईके जीत होगेल आ तबहिसे ब्रह्मबाबाके दहिनाओर माईके पूजा होएलागल । गाँओमे आईतक ब्रह्मबाबाके दहिनाओर नेटुनिया माईके पूजा होरहल हए । गाँओके पुरनिया राम दरेश महतोके माईके पूजाके सम्बन्धमे कहनाम रहल हए ।
गाँओसे निकलेके बेरिया केतनो भी रातमे काहे नहोखो जब कौनो नेटुनिया माईके नाओ लेके पुकारले तब माई कौनो न कौनो रुपमे आके रक्षा करले । दोसर पुरनिया लक्ष्मीनिया देवीके थप कहनाम हए कि गाँओके सिमानभर नेटुनिया माई सभीके रक्षा करले । गाँओके भित्तर विभिन्न देवदेवीके कोपसे गाँओबासीके रक्षा करेके साथे गाँओके कल्याणमे माई हरदम लागल रहइछत । आजो भी गाँओके लोगमे माईपर बहुत भारी श्रद्धा रहल हए ।
नेटुुनिया माई पोखरीके संरक्षणके आवश्कता रहल हए । सभीओरसे ई आध्यात्मिक महत्वके पोखरीके संरक्षण कके भविष्यके लेल बचानाइ जरुरी रहल स्थानीयबासीके कहनाम हए ।

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