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आजके दानवीर साहनीप्रतिके भाव

आजके दानवीर साहनीप्रतिके भाव

बज्जिका भाषाके सेवाप्रति समर्पित आदरणीय साहित्यकार बिन्दा साहनी ‘विश्व–सञ्जय बज्जिका साहित्य कोष’के अक्षय कोष घोषणा समारोहमे २५ हजार रुपैया नगद योगदान देबेके घोषणा कएलथिन । साथमे, ई कहलथिन – हम अपन नएका घर अपना शेषके बाद बज्जिकाके दानमे देबेके घोषणा करइछी ।
ई घोषणाके साथ साहित्यकार साहनीके उदारतापर चर्चा चलेलागल । 
साहित्यकार साहनी सेवा निवृत्त शिक्षक हथिन । हुन राजनीतिके मर्मज्ञ भी हथिन । विश्वेश्वरप्रसाद कोइरालाके भेट कएल आदमी हुन विपि कोइरोलाके एगो कथा सङ्ग्रहके बज्जिकामे अनुवाद भी कएले छथिन ।
बज्जिका, नेपाली आ हिन्दीमे दमदार कविता लिखेवाला साहित्यकार साहनीके दर्जनों कविता अनेक प्रतिष्ठित पत्रिका आ अनलाइनमे प्रकाशित हए । 
रौतहटके सदरमुकाम गौरस्थित अपन घर अपना शेषके बाद विपि प्रतिष्ठानके नामपर दानमे देबेके घोषणा करचुकल छथिन । सदरमुकाम गौरमे रहल घर दानमे देबेके घोषणा दशकों पहिले करचुकल साहनी अब अपन जन्मस्थलके जमिनपर नवनिर्मित घर भी दानमे देबेके घोषणा कएले छथिन । रौतहटके माधव नारायण नगरपालिका २ खेसरहियामे नवनिर्मित घरके दानमे देबेके घोषणा कएलाके बाद साहनीके प्रति अनेक भाव प्रतिक्रियाके रूपमे आएल हए । 
बज्जिका मंदाकिनीके संचालक चर्चित साहित्यकार मणिभूषण प्रसाद सिंह अकेला लिखइछत – जय हो । बज्जिका भाषा लेल अजगुत समर्पण । धन्न हतन आदरणीय बिन्दा साहनीजी । नमन करइत हती ।
अइसही ओम नमः शिवाय नामसे ओही पटलपर प्रतिक्रिया देले छत – आजके जुगमे, अपन भाषा लेल एतना बडगो समर्पण करेवाला आहां एगो अजगुत मिशाल हती ।
समाचार पढलाके बाद मुजफ्फरपुरसे साहित्यकार पुष्पा गुप्ता लिखइछत – आदरणीय, बहुत बडा उदगार, त्याग आ समर्पण करेवाला महान विभूतिके लेल बहुत बहुत आभार । शुभकामना बज्जिका परिवारके ओरसे । 
अइसही साहित्यकार प्रवीण कुमार लिखइछत – जेतना हिनकर बराई कएल जाए, ऊ कम हए ।
हाजीपुरसे चर्चित साहित्यकार लिखइछत – अजगुत, अतुलनीय, अविश्वसनीय । बज्जिका सेवाके इतिहास पुरोधाके असीम अभिनन्दन । जय बज्जिका । जय बज्जिकांचल ।
अइसही चर्चित गीतकार आ साहित्यकार साधना कृष्ण प्रतिक्रिया देइछथिन – दानवीर हतन साहनीजी । बहुत बहुत शुभकामना ।
सीतामढीके हंसलाल साह लिखइछत – अहू जमानामे दानवीर कर्णके समान जोधा हथिन भाइ बिन्दा साहनीजीके अपन हृदयसे हार्दिक आभार । 

पटलपर माध्यम उपनामसे साहनीजीके प्रशंसा करइत लिखइछत – दानवीर, बिन्दाजीसे परिचित नहोएके बावजूद हम हुनकर दानशीलता, बज्जिकाके प्रति समर्पणके हिरदयसे धन्यवाद और साधुवाद देरहली ह कि हुनकर समर्पण बेकार नजाई, आ हुनकर अरमान जल्दी पूरा होई, ई हम्मर आत्मा कहइत हए । अइसही साहसी सज्जन महापुरुषके हम्मर शत शत नमन ।
भारत, नेपालसे लेके अमेरिकातकके विभिन्न साहित्यानुरागी, भाषासेवी तथा साहित्यकार आ बिन्दा साहनीजीके शिष्यलोग हुनका कामके खुलके प्रशंसा करइत आजुके जुगके दानवीरके संज्ञा देइत उच्च सम्मान प्रकट कएले छत । 
अभितक बज्जिका सेवामे ई सबसे लमहर योगदान आ त्याग रहल मानलगेल हए ।
बज्जिका भाषा, साहित्य आ संस्कृतिके इतिहासमे श्री बिन्दा साहनी ऊ एगो सम्मानके नाम बनल छथिन जे बज्जिका माईके उच्च सम्मान देलथिन । साहित्यकार रेणु गुप्ताके कहनाम हए – अपन सर्वस्व देबेवाला परम आदरणीय साहनीके बज्जिकाप्रतिके जे मनमे श्रद्धा देखलगेल, ऊ सभी किसिमके मूल्यांकनले बहुत उपर हए । 
चालिस बरससे बेसी शिक्षादान कएले, विद्यालयसे विश्वविद्यालयतक साहित्यके अध्यापनसेवा कएले साहनीके जीवनके उत्तरार्धमे बज्जिका साहित्यसिर्जनसे जुटलथिन । आ, जब हिरदा जुटइअ तब समर्पणके दीपक अन्तर्मनमे बरइअ, ओकर प्रकाशसे आलोकित होइअ अइसन प्रभाव जेसे देखाइपरइअ – बुद्धत्व । 
लोभ, मोह, क्रोध आ सभी प्राप्तिसे उपर उठल आदरणीय साहित्यकार बिन्दा साहनी बज्जिका मातृभाषाके इतिहासमे अपन नाम सोनाके अक्षरसे लिखते छत । साभार: फूलदानी ब्लॉगस्पॉट

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